सिर्फ एक हुनर जो आपकी जिंदगी बदल कर रख देगा…..

क्या आपको आपके जिंदगी का एक ऐसा दिन याद है, जब आप दुख से तड़प रहे थें ? चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक? एक ऐसा दिन जब दर्द आपके बरदाश्त के बाहर चला गया हो? लाख कोशिशों के बाद भी उस पीड़ा का अंत ना हुआ हो ? एक ऐसा दिन जब आपने गहन निराशा का अनुभव किया हो ? एक ऐसा दिन जब आप थक चुके थे, टुट चुके थे, जिंदगी से उब चुके थे ? उस वक़्त आपके दिमाग में क्या हो रहा था ? क्या इमेजेस आपके दिमाग में दौड़ रही थीं ? आपको आपके शरीर में क्या महसूस हो रहा था ? उस दर्द का एहसास कैसा था ? आपके साथ क्या हो रहा था ? कौनसी भावनाओं को आप महसूस कर रह थें ?

एक हुनर  और आपकी जिंदगी

Focus, neuro, psychology

क्या इस दुख या दर्द की अवस्था में हम जिंदगी में उमदा प्रदर्शन कर सकते हैं ? आप कहेंगे, हरगीज नहीं । पर क्या आपको पता है, आपने जो दुख, दर्द महसूस किया, उससे सौ गुना ज्यादा दर्द महसूस करने के बाद भी क्या कोई ऑलिम्पिक में गोल्ड जीत सकता है ?

जिंदगी भर व्हिलचेअर पर बैठकर इस एथलीट ने खेलों की दुनिया में नए किर्तीमान प्रस्थापित किए । मारीके वेवोर्त 37 साल की है । वह लंदन पैरालिम्पिक में चार साल पहले 200 मीटर की रेस में सिल्वर और 100 मीटर की रेस में गोल्ड मेडल जीत चुकी है । व्हीलचेअर पर जब वह दौड़ लगाती है, तब उसकी फुर्ती देखने लायक होती है । उसका आत्मविश्वास, उसका जस्बा, उसकी ऊर्जा, उसकी जीत की भूख, उसे औरों से अलग खड़ा करती है । शायद शारीरिकरूप से वह उस व्हिलचेअर पर सीमित हो गयी है । पर मानसिकरूप वह प्रचंड शक्तिशाली है । उसका हार न मानने का जस्बा उसे बदतर हालातों में भी जिंदा रखता है । अब आनेवाले पैरालिम्पिक में वह मेडल की मजबूत दावेदार है ।

दर्द क्या होता है? यह शायद मारीके वेवोर्त से अच्छा किसीको पता नहीं होगा । जब आप उसकी पीड़ा को देखेंगे । तब शायद आपको आपके दर्द पर हंसी आएगी । आप शायद आपके दुख को, दर्द को, दुख दर्द कहने से भी कतराने लगोगे । शायद मारीके वेवोर्त का दर्द आपके दुख की परिभाशा बदल देगा ।

जिंदगी बहुत छोटी है

जिंदगी बहुत छोटी है । आपको आपके दुख दर्द पर हँसना चाहिए । नहीं, तो हम कभी भी उनसे आगे निकल नहीं पायेंगे । – जेफ रौस

आपको जानकर हैरानी होगी की मारीके वेवोर्त को अब मृत्यु को गले लगाना है । यह उसकी आखरी ख्वाहिश है । पर मरने से पहले उसे उसकी और एक इच्छा पूरी करनी है । उसे रियो पैरालिम्पिक में गोल्ड मेडल जितना है । इस वक्त यह चैम्पियन गहरे दर्द से गुजर रही है । शारीरिक पीडा इतनी सघन हो चुकी है कि रातों को वो ठिक सो भी नहीं पाती । रातरात भर दर्द से करहाती हुई सुबह होने का इंतजार करती है । इस चैम्पियन को स्पाइन की एक ऐसी बीमारी हुई है, जिसका कोई भी इलाज नहीं हो सकता । स्पाइन की यह लाईलाज बीमारी लाखों में किसी एक को होती है और इससे उसको भयंकर दर्द होता है । वह इस दर्द से तड़पती है । वह कहती है, “रियो के बाद मेरा करियर खत्म हो जाएगा । मैंने इच्छामरण के बारे में सोचना शुरू कर दिया है । मुझे रोज बेहद दर्द से गुजरना पड़ता है । मैं रातों को ठीक से सो भी नहीं पाती हूँ । किसी किसी रात तो मैं सिर्फ 10 मिनट ही सो पाती हूँ । इस सबके बाद मुझे ट्रेनिंग भी लेनी होती है । भले ही मैं अपनी बीमारी से लड़ रही हूँ , लेकिन मैं हार्ड प्रैक्टिस करती हूँ । उम्मीद है, कि मैं रियो में पोडियम पर गोल्ड मेडल के साथ अपना करियर खत्म करूँगी । मैं चाहती हूँ , सब लोग हाथों में शेम्पैन का गिलास लेकर मुझे याद करें । मैं बेहद दर्द से गुजर रही हूँ , लेकिन फिर भी मैं रियो में गोल्ड जीतना चाहती हूँ ।’’

अब सवाल यह है, कि इतने दर्द के बावजूद मारीके वेवोर्त किस प्रकार से प्रैक्टिस कर पाती है ? हर दिन सुबह वह इस दर्द को कैसे हरा पाती है ?….शायद वह उसके दिमाग में कुछ ऐसा कर रही है, जो हमें पता नहीं है, या हमें उसका अभ्यास नहीं है । वह बहुत ही कुशलता से खुदके दिमाग में उसका फोकस शिफ्ट कर रही है । वह उसका फोकस दर्द से हटाकर प्रैक्टिस पर ला रही है । वह उसका फोकस दुख से हटाकर उसके सपने पर ला रही है । वह उसका फोकस असंभव से संभवपर ला रही है । यह करने में वह इतनी कुशल हो चुकी है, कि रात को दर्द से तड़पने के बाद भी सुबह पूरी ऊर्जा से प्रैक्टिस शुरू करती है ।

आगे वह कहती है, ‘‘मैं रियो में मेडल जीतना चाहती हूँ, लेकिन यह बहुत मुष्किल होगा, क्योंकि मुकाबला बेहद कड़ा है । मैं हर लम्हें को जीना चाहती हूँ । जब मैं कुर्सी पर बैठती हूँ, तो मेरी नजरों के सामने से हर चीज गायब हो जाती है । मैं नेगेटिव सोच को दूर रखती हूँ । मैं डर, दुख और तकलीफ को अपने करीब नहीं आने देती । मैंने एैसे ही पिछले ऑलिम्पिक में मेडल जीते हैं और इस ऑलिम्पिक में भी जीतुंगी ।’’

आप पढ़ रहे हैं- “सिर्फ एक हुनर जो आपकी जिंदगी बदल कर रख देगा…..”

हमारा फोकस- इसे कैसे नियंत्रित करें?

नविनतम खोंजे बता रही है कि फोकस हमारे मसल जैसे काम करता है । अगर हमने उसका उपयोग नहीं किया, तो वह धीरे धीरे नष्ट हो जाता है, जैसे ही हम उसका उपयोग करने लगते हैं, वैसे वैसे फोकस करने की हमारी क्षमता बढ़ने लगती है । अगर हमें जिंदगी में बेहतरीन परिणाम लाने हैं और साथ में आनंद से जीना है, तो हमें हमारे जीवन में सोच की एक ऐसी प्रणाली विकसीत करनी होगी । जहाँ पर हमारा फोकस हमेशा बेहतरीन परिणामों पर हो, ऐसे परिणाम या रिझल्ट, जो हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है । जब हम लगातार दृढ़ता से हमारे परिणामों पर फोकस करते है, तब तुरंत ही हमारा वर्तन और सोच दोनों बदल जाते हैं । जिंदगी में जिस पर हमारा फोकस होता है, उसी का हम अनुभव करते हैं और मन के गहन स्तर पर उसे ही जीने लगते हैं । अगर हम हमारे समस्याओं पर फोकस करते हैं, तो वे समस्याएँ बढ़ती जाएँगी, समस्याओं पर का आपका फोकस आपको असहाय महसूस कराएगा । जिससे आपका वर्तन प्रभावित होगा और इससे और नई समस्याएँ पैदा होगी । इससे उल्टा अगर आपका फोकस अगर आपके बेहतरीन प्रदर्शन पर होगा, तो आपको नई संभावनाएँ दिखाई देगी । इससे आपको ऊर्जा का अनुभव होगा, जिससे आपका वर्तन प्रभावित होगा और इससे और नई संभावनाएँ आपको दिखाई देगी और आपका प्रदर्शन और बेहतरीन होगा ।

फोकस को नियंत्रित करना

इसीलिए अगर जिंदगी में आपको सिर्फ एक कौशल सीखना हो, तो वह होगा ‘आपके फोकस को नियंत्रित करना और उसे सही दिशा देना ।’ यह एक कौशल आपके जीवन को बदल कर रख देगा । आखिरकार हमारी जिदंगी है क्या ? हमारा फोकस ही तो हमारी जिंदगी है । हम सबके जीवन में इस वक्त हजारों चीजे घट रही हैं, जो खुश है, वह खुशी पर फोकस कर रहा है, जो दुखी है, वो दुख पर फोकस कर रहा है, जो उत्साही है, वह उत्साह पर फोकस कर रहा है । जो निराश है वह निराशा पर फोकस कर रहा है और इससे जिस पर फोकस किया जा रहा है, वह चीजे बढ़ती जा रही है । चाहे वह नकारात्मक हो, या सकारात्मक । अब सवाल यह है, कि आप किस पर फोकस कर रहे हैं ?

याद रखना ‘हमारा फोकस ही हमारी जिंदगी है ।’

एनएलपी में हम ‘फोकस’ हमारे दिमाग में किस प्रकार से खड़ा कर सकते हैं, यह सीखाते हैं । हमें लगेगा, कि ‘फोकस’ एक शब्द है, पर नहीं फोकस एक दिमागी प्रक्रिया है । अगर यह दिमागी प्रक्रिया है, तो उसके कुछ इन्ग्रेडियंटस् याने घटक होंगे और अगर उसके कुछ घटक होंगे, तो उन्हें जानने के बाद हम उस फोकस को बड़ी ही आसानी से खुद के दिमाग में खड़ा कर सकते हैं । एनएलपी हमें फोकस के इन्ग्रेडियंटस् के बारे में समझाता है और उसे खुद के जीवन में खड़ा करने में मदद करता है ।

अब एक ऐसे सवाल के साथ आपको छोड जाता हूँ , जिससे मैंने मेरे फोकस को नियंत्रित किया, उसे दिशा दी । जब भी कोई उलझन होती है, तो मैं यह सवाल खुद से पूछता हूँ….

कौन से ऐसे विशिष्ट परिणाम है, जो प्राप्त करने के लिए मैं प्रतिबध्द हॅूं ?

चलो फिर अगले ब्लॉग में मिलते हैं । तब तक के लिए ‘एन्जॉय युवर लाईफ अॅन्ड लिव्ह विथ पॅशन ।’

– संदिप शिरसाट

(लेखक इंडियन बोर्ड ऑफ़ हिप्नोसिस अॅन्ड न्यूरो लिंगविस्टिक प्रोग्रॅमिंग के संस्थापक अध्यक्ष तथा एन.एल.पी. मास्टर ट्रेनर है ।)

क्या आप भी चाहते हैं कि आपका व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन सफलता की बुलंदियों को छुएं? अगर ‘हाँ’ तो एन.एल. पी. के जादुई और ताकदवर तकनीकों से आप स्वयं के व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन को रूपांतरित कर सकते हैं । तो एन.एल.पी. कोर्सेस के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें या मास्टर एन.एल.पी. ट्रेनर संदिप शिरसाट को आप का पर्सनल लाइफ कोच बनाने के लिए आज ही संपर्क करें – +919834878870 या हमें लिखिए satish@ibhnlp.com

This post is send by Mr. Sandip. We are grateful to mr. Sandip. if you like this post you can share this on facebook and your social media network. thanks.

HindiSuccess के नए पोस्ट की जानकारी ई-मेल पर पायें

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *