अमरीका डॉ. महेश परिमल की नजर से

Dear readers, हमने पिछली पोस्ट ‘यात्रा देश विदेश की : अनुभव और संस्मरण-1’ में कहा था कि जल्दी ही हम हिंदी ब्लॉग पर अमेरिका की संस्कृति, जीवन शैली और वहां के रोचक अनुभवों पर कुछ नया पोस्ट करेंगे. तो आज हम डॉ. महेश परिमल जी की अमेरिका यात्रा के कुछ रोचक अनुभव विशेष रूप से वहां की संस्कृति, शिक्षा और वहां के निवासियों की अच्छी आदतों के बारे में यहाँ डॉ. परिमल जी के संस्मरण शेयर कर रहे हैं. हम आभारी हैं डॉ. महेश परिमल जी के कि उन्होंने इतने अच्छे अनुभव हमारे साथ शेयर किये.

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अमेरिका डॉ. महेश परिमल की नजर से

 

अमरीका डॉ. महेश परिमल की नजर से           इस बार मैं अमेरिका की संस्कृति की चर्चा करुंगा। अमेरिकी खुशमिजाज हैं। अपने काम से काम रखते हैं। पर व्यावहारिक भी बहुत हैं। थैक्यू और सॉरी शब्द उनकी जबान में हमेशा रहता है। वे लोग काम के प्रति समर्पित हैं। दूसरों से कोई लेना-देना नहीं। कम से कम बातचीत और अधिक से अधिक काम में विश्वास रखते हैं। युवतियाँ कान में ईयर फोन लगाकर ही घर से बाहर निकलती हैं।
जहाँ जगह मिली, वे नाचने-गाने में भी संकोच नहीं करते। पूरी मस्ती के साथ जीवन जीते हैं। वहाँ हर घर में कार है,सभी कार चलाते हैं। फिर भी युवक-युवतियाँ साइकिल पर कॉलेज जाने या फिर घूमने के लिए निकलती हैं। शनिवार-रविवार को वहाँ बाइक और साइकिल किराए पर भी मिलती हैं। ताकि लोग छुट्‌टी के मजे ले सकें।

अमरीका के बारे में कुछ और बातें बिंदुवार इस प्रकार हैं.

सहेजने की प्रवृत्ति

 

फिलाडेल्फिया में कई ऐसे संग्रहालय हैं, जहां अमूल्य निधि सँजोकर रखी हुई है।

आप पढ़ रहे हैं अमरीका डॉ. महेश परिमल की नजर से.

शिक्षा के प्रति समर्पित अमेरिकी

गुड फ्राइडे को मैंने वहां बच्चों को स्कूल जाते हुए देखा। उस दिन मैं कहीं भी किसी तरह का जलसा होते नहीं देखा।
बारहवीं तक सभी की शिक्षा मुफ्त है। स्कूलों में हर तरह के खेलों के लिए बड़े-बड़े मैदान हैं। एक स्कूल करीब चार-पाँच एकड़ जमीन पर होता है। अंदर बच्चों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था होती है। एक क्लास में 20 से अधिक बच्चे नहीं होते। बच्चे की एक-एक हरकत पर कैमरे से निगरानी होती है। ताकि यह पता चल सके कि बच्चे का दिलचस्पी किस काम पर अधिक है।
लोग कानून से बहुत डरते हैं
वहाँ व्यक्ति कानून से नीचे है। कानून को हाथ में लेने से हर कोई डरता है। सभी देश के नियम-कायदों की इज्जत करते हैं। हमारे यहां जिस तरह से यातायात के नियमों को तोड़ना अपनी शान समझते हैं, वहाँ ऐसा नहीं है। जो कानून तोड़ेगा, उसे सजा भुगतनी ही है। पूरे अमेरिका में
व्यक्ति कहीं भी हो, अपनी पहचान नहीं छिपा सकता। आधार कार्ड की तरह एक कार्ड होता है, जो सभी सरकारी काम में उपयोग में लाया जाता है। आपके तमाम कागजात में उस नम्बर का जिक्र होता है। उस नम्बर के आधार पर कुछ ही सेंकेंड मं आपको ट्रेस किया जा सकता है।

खुशमिजाज अमेरिकी

 वहां के लोग खुशमिजाज हैं। अपने काम के प्रति पूरी तरह से समर्पित। अपरिचितों से न के बराबर बातचीत करते हैं। पर उन्हें सम्मान दो,तो वह मुस्करा धन्यवाद कहना नहीं भूलते। बच्चों को बहुत प्यार करते हैं। जहाँ कहीं भी छोटा-सा प्यारा बच्चा दिखा कि वे उसे अपनी गोद में लेने को आतुर दिेखते हैं। सड़क किनारे मोबाइल पर तेज आवाज के साथ युवक-युवतियाँ डांस करते दिखाई दे जाते हैं। खुशी मनाने का कोई अवसर वे नही छोड़ते।

अमरीका के सुखद संस्मरण

डॉ महेश परिमल जी की अमरीका यात्रा के अनुभव. हमारे अनुरोध पर उन्होंने एक सुखद अमरीका यात्रा  और उस के संस्मरण साझा किये.

समय के पाबंद अमेरिकी

यदि डॉक्टर से मरीज ने समय लिया होता है, तो मरीज की पूरी कोशिश होती है कि वह समय पर पहुँचे। इस बीच यदि उसका वाहन खराब हो जाए,तो वह किसी को भी यह कारण बताकर लिफ्ट ले लेता है। लोग खुशी से उसकी सहायता करते हैं। जहाँ कहीं भी जाना, तो वे समय से पहले पहुँचने की पूरी कोशिश करते हैं। हाँ भारतीय कहीं कोई कार्यक्रम आयोजित करते हैं, तो उसमें देर हो ही जाती है।

अमेरिकियों की सैलानी प्रवृत्ति

सड़क पर चलते हुए कई ऐसे लोग भी दिखाई दे जाते हैं,जो एक पटे पर खड़े होकर कारों के साथ-साथ चलते रहते हैं। लकड़ी के पटे पर बेयरिंग लगी होती है, जिस पर वे आड़ा खड़े होकर सड़क पर चलते हैं। जहाँ कहीं भीड़ हुई, वह उसे अपने कांधे पर रखकर पैदल चलना शुरू कर देते हैं। मनमौजी की तरह से कहीं भी दिखाई दे जाते हैं। इसमें युवक ही नहीं, युवतियाँ भी शामिल होती हैं।

भेदभाव नहीं

वहाँ काले लोगों की संख्या बहुत है। यात्री बस, स्कूल बस को अक्सर महिलाएँ ही चलाती हैं। बड़े-बड़े ट्रेकर भी महिलाओं को चलाते देखा है मैंने। कुछ युगल ऐसे भी दिखाई दे जाते हैं, जिसमें महिला गोरी एवं पुरुष काला, दोनों पति-पत्नी के रूप में। दोनों की दो संतानें, बेटी काली और बेटा पूरा गोरा। लेकिन वे बिंदास होकर मॉल या स्टोर में सामान की खरीददारी करते हुए दिखते हैं। कालों की संख्या को देखते हुए स्टोर में उनके हिसाब से कपड़े आदि रखे होते हैं। तम्बू आकार के शर्ट-पेंट आदि देखकर ऐसा लगता है कि यह शो-पीस है। पर ऐसा नहीं, वहाँ ऐसी चीजों के खरीददार होते हैं।

अमेरिकियों का शांत स्वभाव

 वहाँ किसी को कहीं भी जाने की हड़बड़ी नहीं होती। पूरे इत्मीनान से वे गाड़ी चलाते हुए चले चलते हैं। यदि किसी को जल्दी है, तो उसके वाहन की गति से सभी समझ जाते हैं और उसे रास्ता दे देते हैं। पर ऐसा कम ही होता है। सब एक-दूसरे का खयाल रखते हुए अपने वाहन चलाते हैं।

अमेरिका में हिंदी का माहौल

 न्यू हेम्पशायर में मैं एक हिंदी के कार्यक्रम में शामिल हुआ। पूरे पाँच घंटे तक चलने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होकर ऐसा लगा ही नहीं कि मैं भारत से बहुत दूर Amerika में हूं। सभी लोग हिंदी में बात करते हुए। दो नाटक भी हिंदी के। लोगों ने अपनी कविताएँ भी सुनाई,शायरी भी सुनाई। पूरा माहौल हिंदी का था। मुझे लगा मैं तो मानों अपने ही शहर के किसी कार्यक्रम में शामिल हुआ हूँ।

अमेरिका में परस्पर सम्मान

वहाँ लोग एक-दूसरे को पूरा सम्मान देते हैं। रिसेप्शन में पहुँचते ही पहले  गुड मार्निंग, हाऊ आर यू से बातचीत की शुरुआत करते हैं। फिर भले काम की बातें शुरू हो जाए। इस दौरान कहीं किसी के चेहरे पर आलस या पराएपन का अहसास होता दिखाई नहीं दिया। पूरे सम्मान के साथ वे अभिवादन करते हैं। बातें करते हैं। िकसी मॉल या स्टोर में जाते हुए हम किसी के पीछे जा रहे है, तो वे दरवाजा खोलकर पहले हमें जाने देते हैं,फिर वे प्रवेश करते हैं। इस दौरान हमें उन्हें धन्यवाद अवश्य कहना चाहिए।
यदि हम ऐसा करें, तो वे खुश होकर धन्यवाद अवश्य कहते हैं।

उत्सव  प्रेमी अमेरिकी

चूँकि अमेरिकी उत्सव प्रिय होते हैं, इसलिए किसी के घर पार्टी हो, तो शराब अपनी ही ले जाते हैं। ताकि सामने वाले को किसी तरह की परेशानी न हो। जन्म दिन, सालगिरह आदि समारोह सप्ताहांत में ही आयोजित किए जाते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग आकर एंज्वाय कर सकें।
-डॉ. महेश परिमल,

 

वरिष्ठ पत्रकार, दैनिक भास्कर समूह, भोपाल म.प्र.
डॉ. महेश परिमल जी का पत्रकारिता और हिंदी साहित्य के क्षेत्र में जाना पहिचाना नाम है. डॉ. परिमल जी जब अपने अमरीका प्रवास पर थे तब हमने उनसे विशेष अनुरोध किया था कि आप अमेरिका के स्कूलों में जाकर वहां की शिक्षा व्यवस्था के बारे में विशेष रूप से अवलोकन करें और वहां के अनुभव हमारे साथ संस्मरण के रूप में शेयर करें. हम उनका हार्दिक धन्यवाद देना चाहते हैं कि उन्होंने हमारे इस अनुरोध को स्वीकार किया और अपने अनमोल अनुभव और विचार हमारे साथ साझा किये.
We are grateful to Dr. Mahesh Parimal Ji to share his beautiful experiences of Amerika trip with us in Hindi.
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