छठ पूजा कब और क्यों मनाई जाती है?

Chhath Puja 2021. आप सभी को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं। जानिए कैसे और कब मनाया जाता है छठ माई का महा त्यौहार chhath puja और 2021 में किस date को यह मनाया जायेगा। Happy chhath puja quotes and information in Hindi भाषा।

भारत में प्रति वर्ष महिलाएं सुख, शांति और समृद्धि के लिए पवित्र फलदायक छठ पर्व मनाती हैं और chhath puja करती हैं। यह पूजन विशेष फलदायिनी होती है। विधि विधान से पूजन करने वाले लोगों को इसका फायदा अवश्य मिलता है ऐसी धार्मिक मान्यता है।

कब मनाया जायेगा 2021 में छठ पूजा का त्यौहार

सन 2021 में बुधवार 10 नवम्बर को यह त्यौहार मनाया जायेगा। यह पर्व ख़ास तौर से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में मनाया जाता है। छठ पूजा आजकल भारत के दूसरे प्रदेशों में भी उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाने लगी है।

आप सब को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं

मंदिर की घंटी, आरती की थाली

नदी के किनारे सूरज की लाली

जिंदगी में आए खुशियों की बहार

आपको मुबारक हो छठ का त्योहार।

छठ पूजा के शुभकामना संदेश

सबके दिलों में हो सबके लिए प्यार
आने वाला हर दिन लाए खुशियों का त्योहार
इस उम्मीद के साथ आओ भुलाकर सारे गम
छठ पूजा का हम सब करे वेलकम।

Best Chhath Puja Greetings in Hindi

आया है भगवान सूर्य का रथ

आज है मनभावन सुनहरी छठ

और मिले आपको सुख संपति अपार

छठ की शुभकामनाएं करें स्वीकार।

Beautiful Happy Chhath Whatsapp Message

इस छठ पूजा में आपकी हर मुराद पूरी हो।

हर पल आपकी दिल की खुशी से पूरी हो

सूर्यदेवता आप पर हमेशा रहें मेहरबान।

है यही कामना, जिंदगी में ना हों परेशान।

Happy Chhath.

कार्तिक छठ पर्व की शुभकामना

मंदिर की घंटी, आरती की थाली

नदी के किनारे सूरज की लाली।

जिंदगी में आए खुशियों की बहार

आपको मुबारक हो छठ का त्यौहार

छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं।

हिंदी सक्सेस डॉट कॉम इस अवसर पर सभी देशवासियों के लिए मंगल कामनाएं करता है और हार्दिक बधाई देता है।

Chhath puja me kiski upasna ki jati hai?

छठ पूजा में सूर्य देव की उपासना की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, छठ माता को सूर्य देवता की बहन माना जाता है। कहते हैं कि सूर्य देव की उपासना करने से छठ माई प्रसन्न होती हैं और मन की सभी मुरादें पूरी करती हैं।

Happy Chhath Puja

kab manaya jata hai chhath parv

छठ पूजा को सूर्य षष्ठी के रूप में भी मनाया जाता है। यह त्योहार कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है। दिवाली के 6 दिन बाद मनाया जाने वाला यह त्योहार चार दिनों तक चलता है। चार दिवसीय छठ पर्व कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल सप्तमी तक चलता है।

chhath devi koun hai

छठ देवी को सूर्य देव की बहन माना जाता है। लेकिन छठ व्रत कथा के अनुसार, छठ देवी ईश्वर की पुत्री देवसेना बताई गई हैं। देवसेना अपने परिचय में कहती हैं कि वह प्रकृति की मूल प्रवृत्ति के छठवें अंश से उत्पन्न हुई हैं यही कारण है कि उन्हें षष्ठी पुकारा जाता है। वह कहती हैं अगर आप संतान सुख चाहते हैं तो उनकी विधि-विधान से पूजा करें। इस पूजा को कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन करने का विधान बताया गया है। Chhath Puja भारत में बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।

Mahabharat काल से जुड़ी छठ की कथा

कहते हैं कि सूर्यदेव के अनुष्ठान से उत्पन्न कर्ण जिन्हें अविवाहित कुंती ने जन्म देने के बाद नदी में प्रवाहित कर दिया था वह भी सूर्यदेव के उपासक थे। वे घंटों जल में रहकर सूर्य की पूजा करते रहे। मान्यता है कि कर्ण पर भगवान सूर्य की कृपा सदैव बनी रही। यही कारण है कि भगवान सूर्य की उपासना की जाती है।

छष्ठी मैया को प्रसन्न करने हेतु विभिन्न प्रकार की पूजा अर्चना की तैयारी की जाती है।

Mahabharat काल से जुड़ी छठ की कथा
कहते हैं कि सूर्यदेव के अनुष्ठान से उत्पन्न कर्ण जिन्हें अविवाहित कुंती ने जन्म देने के बाद नदी में प्रवाहित कर दिया था वह भी सूर्यदेव के उपासक थे। वे घंटों जल में रहकर सूर्य की पूजा करते रहे। मान्यता है कि कर्ण पर भगवान सूर्य की कृपा सदैव बनी रही। यही कारण है कि भगवान सूर्य की उपासना की जाती है।

Ramayan se छठ पूजा अर्चना का संबंध

हिंदुओं की मान्यताओं में छठ पूजा का संबंध कई जगह मिलता है।
एक पौराणिक कथा के अनुसार, रामायण काल में भगवान राम के अयोध्या आने के बाद माता सीता के साथ मिलकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य की उपासना करने से भी जोड़ा जाता है। इसके महाभारत काल में कुंती द्वारा विवाह से पूर्व सूर्योपासना से पुत्र की प्राप्ति से भी इसे जोड़ा जाता है।

कैसी होती है छठ पूजा की विधि:

छठ पर्व के दिन प्रात:काल स्नानादि के बाद संकल्प लिया जाता है। संकल्प लेते समय इस मन्त्र का उच्चारण किया जाता है-

ॐ अद्य अमुक गोत्रो अमुक नामाहं मम सर्व पापनक्षयपूर्वक शरीरारोग्यार्थ श्री सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।

छठी मैया की पूजन करने हेतु विभिन्न प्रकार की पूजा सामग्री एकत्रित की जाती है। खास तौर से निम्नांकित सामग्रियों को एकत्रित किया जाता है:

नए वस्त्र, बांस की दो बड़ी टोकरी या सूप, थाली, पत्ते लगे गन्ने, बांस या फिर पीतल के सूप, दूध, जल, गिलास, चावल, सिंदूर, दीपक, धूप, लोटा, पानी वाला नारियल, अदरक का हरा पौधा, नाशपाती, शकरकंदी, हल्दी, मूली, मीठा नींबू, शरीफा, केला, कुमकुम, चंदन, सुथनी, पान, सुपारी, शहद, अगरबत्ती, धूप बत्ती, कपूर, मिठाई, गुड़, चावल का आटा, गेहूं।

इंटरनेट पर छठ पूजा विधि विधान से करने के लिए बहुत सारी जानकारी उपलब्ध है। अर्घ्य देने के लिए बांस की तीन बड़ी टोकरी या बांस या पीतल के तीन सूप लें। इनमें चावल, दीपक, लाल सिंदूर, गन्ना, हल्दी, सुथनी, सब्जी और शकरकंदी रखें। साथ में थाली, दूध और गिलास ले लें। फलों में नाशपाती, शहद, पान, बड़ा नींबू, सुपारी, कैराव, कपूर, मिठाई और चंदन रखें। इसमें ठेकुआ, मालपुआ, खीर, सूजी का हलवा, पूरी, चावल से बने लड्डू भी रखें। सभी सामग्रियां टोकरी में सजा लें। सूर्य को अर्घ्य देते समय सारा प्रसाद सूप में रखें और सूप में एक दीपक भी जला लें। इसके बाद नदी में उतर कर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करें।

ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥

छठ पूजा में लहसुन और प्याज का निषेध है। इस त्यौहार के दिनों में घर में लहसुन और प्याज का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

2021 में 10 नवम्बर को छठी मैया का पर्व मनाया जायेगा। ध्यान रखें विधि विधान का पालन करते हुए यह पूजन करना चाहिए तभी इसका सुफल प्राप्त होगा।

छठ पूजा: संध्या अर्घ्य और प्रात:काल के अर्घ्य का समय 2021:

10 नवंबर (संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय : 05:30 PM.

11 नवंबर (प्रात:काल अर्घ्य) सूर्योदय का समय : 06:41 AM.

छठ पर्व बिहार मे बड़े धुम धाम से मनाया जाता है। ये एक मात्र ही बिहार या पूरे भारत का ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से चला आ रहा है और ये बिहार की संस्कृति बन चुका हैं। यहा पर्व बिहार कि वैदिक आर्य संस्कृति कि एक छोटी सी झलक दिखाता हैं। ये पर्व मुख्यः रुप से ॠषियो द्वारा लिखी गई ऋग्वेद मे सूर्य पूजन, उषा पूजन और आर्य परंपरा के अनुसार Bihar मे यह पर्व मनाया जाता हैं।

Hinduo ke liye bahut mahatvpurn इस त्यौहार का उद्देश्य सर्वकामना पूर्ति होता है। इसके लिए सूर्योपासना और निर्जला व्रत नामक अनुष्ठान किए जाते हैं।यह व्रत किस तिथि को मनाया जाता है? छठ का व्रत दीपावली के छठे दिन मनाया जाता है।भारत में छठ के समान और भी पर्व मनाए जाते हैं जैसे: ललही छठ, चैती छठ, हर छठ आदि।

कौन से दिन क्या ख़ास पूजन होती है छठ महापर्व में यह सब निर्धारित होता है। चार दिनों में से प्रत्येक दिन खास होता है।

नहाय खाय का क्या मतलब होता है? छठ महापर्व में पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय के रुप में मनाया जाता है। प्रति वर्ष नहाय खाय को सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र बनाए। इसके बाद छठ व्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन को ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करें। घर के बाकी सदस्य व्रत करने वाले के भोजन के उपरांत ही भोजन करें। भोजन के रुप में कद्दू, दाल व चावल को ग्रहण कर सकते है। दाल में चने की दाल को शामिल करें।

खरना का क्या मतलब होता है?

छठी मैया के व्रत में दूसरा दिन खरना व लोहंडा के रूप में जाना जाता है। Chhashthi Mai Vrat में दूसरे दिन कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को व्रतधारी दिन भर का उपवास रखें व शाम को भोजन करें। इसे खरना कहा जाता है। खरना का प्रसाद लेने के लिए आसपास के सभी लोगों को आमांत्रित करें। प्रसाद के रुप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध चावल का पिट्ठा और घी से चुपड़ी रोटी बनाएं। इसमें नमक या चीनी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

संध्या अर्घ्य क्या है छठी मैया की पूजन में

छठ महापर्व में तीसरा दिन संध्या अर्घ्य के लिए खास तौर पर जाना जाता है। झारखंड, बिहार, नेपाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में विषेष रूप से लोकप्रिय इस त्यौहार में तीसरे दिन घर पर छठ प्रसाद बनाते हैं जिसमें ठेकुआ और कसार के साथ अन्य कोई भी पकवान बना सकते है। यह पकवान खुद व्रत करने वाले या उनके घर के सदस्यों मिलकर बनाते हैं। छठ के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तन बांस या मिट्टी के होने चाहिए। शाम को पूरी तैयारी के साथ बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाते हैं। Chhashthi का व्रत करने वाले के साथ परिवार के सारे लोग सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाट पर जाते हैं और वहां सूर्य भगवान को विधि विधान से पूजन करने के साथ अर्घ्य देते हैं।

सुबह का अर्घ्य किस दिन देते हैं छठ पूजा में?आस्थाvके महान एवं पवित्र छठ महापर्व के चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उगते हुए सूर्य की अर्घ्य दिया जाता है। व्रत करने वाले व्यक्ति प्रातः सुबह पूजा की सारी साम्रगी लेकर घाट पर जाते हैं और पानी में खड़े होकर सूर्य भगवान के निकलने का पूरा श्रद्धा से इंतजार करते हैं। सूर्य उदय होने पर छठ मैया के जयकारे लगाकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। आखिर में व्रती ( व्रत करने वाले ) कच्चे दूध का शर्बत पीकर और प्रसाद खा कर अपना व्रत पूरा करते हैं।

Chhath Puja के चार दिनों में नदी के पावन जल में नहाना, सूर्योदय पर पूजा और सूर्यास्त पर पूजा और साथ ही सूर्य को जल चढ़ाना शामिल होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, वेद और शास्त्रों के लिखे जाने से पहले से ही इस पूजा को मनाया जा रहा है क्योंकि ऋग्वेद में छठ पूजा जैसे ही कुछ रिवाजों का जिक्र है। इसका इतना प्राचीन इतिहास इस पर्व के महत्व को दर्शाता है। बिहार, नेपाल, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों और झारखंड में तो यह एक प्रमुख लोकपर्व के रूप में प्रसिद्ध है। भारत के शेष भाग में भी बहुत से लोग भक्ति और श्रद्धा के साथ यह त्यौहार मनाते हैं। कई जगह पर इस दिन सरकारी छुट्टी घोषित की जाती है।

आइए जानते हैं chhath festival से संबंधित कुछ सवालों के जवाब और रोचक जानकारी।

कौन हैं छठ देवी?

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसर षष्‍ठी देवी को ही स्‍थानीय बोली में छठ मैया कहा गया है, जो नि:संतानों को संतान देती हैं और सभी बालकों की रक्षा करती हैं।
प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इन देवी का एक प्रचलित नाम षष्‍ठी है। षष्‍ठी देवी को ब्रह्मा की मानसपुत्री भी कहा गया है।

क्या छठ पूजा सिर्फ महिलाएं ही करती हैं?

छठ पूजा कोई भी कर सकता है, चाहे वह महिला हो या पुरुष। पर इतना जरूर है कि महिलाएं संतान की कामना से या संतान के स्‍वास्‍थ्‍य और उनके दीघार्यु होने के लिए यह पूजा बढ़-चढ़कर और पूरी श्रद्धा से करती हैं।

छठ पूजा से बिहार का क्या विशेष सम्बंध है?

आमतौर पर बहुत सारे लोग chhath puja को बिहार के त्यौहार के रूप में जानते हैं। इसके पीछे Bihar में इस पर्व की अत्यंत लोकप्रियता होना है। छठ पूजा का बिहार से विशेष संबंध क्‍यों है?
सूर्य की पूजा के साथ-साथ षष्‍ठी देवी की पूजा की अनूठी परंपरा बिहार के इस सबसे बड़े लोकपर्व में देखी जाती है। यही बात इस पूजा के मामले में प्रदेश को खास बनाती है। बिहार में सूर्य पूजा सदियों से प्रचलित है। सूर्य पुराण में यहां के देव मंदिरों की महिमा का वर्णन मिलता है। यहां सूर्यपुत्र कर्ण की जन्मस्थली भी है। अत: स्वाभाविक रूप से इस प्रदेश के लोगों की आस्‍था सूर्य देवता में ज्‍यादा है। बिहार प्रदेश में इस पर्व की साल भर प्रतीक्षा की जाती है।

हिंदीसक्सेस डॉट कॉम पुनः आप सभी को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं देता है।

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