दीपक का महत्व: कितने प्रकार के दीए

 दीपक का महत्व और तरह तरह के दीपक

दीपक पर सुविचार, सुन्दर shayary और महत्वपूर्ण जानकारी. दीपक जिसे देशी भाषा में दीया भी कहते हैं प्राचीन काल से ही मनुष्य के लिए एक महत्वपूर्ण वस्तु रही है. शादी विवाह हो, कोई मांगलिक कार्यक्रम हो, ख़ुशी का अवसर हो, किसी का जन्मदिन मनाना हो, भाई बहन का त्यौहार रक्षाबंधन हो या कोई भी धार्मिक रीति रिवाज हर जगह दीपक का अपना एक विशिष्ट महत्व रहा है. 

सनातन संस्कृति में दीपदान का बहुत महत्व है. आपने शायद दीपदान नामक एकांकी भी पढ़ी होगी, जिसमें पन्ना धाय का महत्वपूर्ण चित्रण है.

Deepak ka mahatva, Deep mantra kya hai. आइए जानते हैं भारतीय संस्कृति में दीपक और दीप मंत्र के महत्व के विषय में। दीपक का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व।

दीप मंत्र को दीपक जलाते हुए कहा जाता है। दीप मंत्र में सभी के लिए मंगल कामना की जाती है।

Deepak Par Anmol Vichar Hindi Quotes. प्रेरणादायक उद्धरण और अनमोल कथन। दीपक स्टेटस इन हिंदी. पढ़िए अच्छे विचार. ये एक चिराग कई आँधियों पे भारी है.

हिंदू Religion में कई तरह से दीपक के उपयोग हैं। छोटी कक्षाओं में भी बच्चों को दीपावली त्योहार पर निबंध लेखन करवाया जाता है। इससे हर बच्चा दीए और दीपावली त्यौहार के विषय में जानकारी रखता है.

मिटटी के दीपक के अलावा सोना, चांदी, तांबा, कांसा और लोहे के दीपक भी बनते हैं. सभी दीपकों का एक विशिष्ट महत्त्व है. इन के विषय में पूरी जानकारी के लिए यह पोस्ट शुरू से आखिर तक पढ़िए. कई कई बातियों वाले दीपक बनाये जाते हैं. घी, मीठा तेल, सरसों का तेल, तिल का तेल कई तेलों से दीपक जलाये जाते हैं. 

दीपक का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

हम सब Navratri के deepak से परिचित हैं और करवा चौथ के दीपक से भी. बही दूज और रक्षाबंधन के पर्व पर बहनें अपने भाइयों की दीपक से आरती उतारती हैं. अलग अलग अवसरों पर दीपक का महत्त्व अलग अलग होता है. आध्यात्मिक साधनाओं के लिए भी दीपक का उपयोग किया जाता है. शायद आपको याद हो, एकाग्रता बढाने के लिए भी कुछ लोग दीपक का उपयोग करते हैं. 

बहुत सी साधनाएं दीपक के समक्ष बैठ कर की जाती हैं.

दीपक का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व बहुत ही व्यापक है. हमारी भारतीय संस्कृति में deepak का अत्यधिक उपयोग देखने को मिलता है. विभिन्न भाषाओँ और बोलियों में दीपक को विभिन्न नामों से पहचाना जाता है. इसे दीप, दीया, दिए, दीपक, चिराग, दिये आदि नामों से पहचानते हैं. 

अंग्रेजी भाषा में दीपक के लिए lamp शब्द का prayog करते हैं.

Deepak Shayary

दीये को लेकर शायरों ने कई रोमांटिक शायरियां भी लिखी हैं तो महापुरुषों ने दीये की तुलना roshni, सफलता और उल्लास से की है. दीपक पर सुविचार इंसान की निराशा भरी सोच को हर्ष और उल्लास में बदलने में sahayak होते हैं. दिया खामोश है लेकिन किसी का dil तो जलता है; ऐसी कई रोमांटिक shayary भी बहुत खूबसूरत होती हैं.

शायरी की दुनिया में दीपक को एक एसा स्थान मिला है जो अपने आप में ख़ास है. देशभक्ति की shayary में दीपक को देश के प्रति कर्तव्य और निष्ठा का प्रतीक माना गया है. एक Diya उनके नाम का भी रखना पूजा की थाली में, जिनकी साँसे थम गई है भारत माता की रखवाली में. Internet और social media पर हम दीपक पर एक से बढ़ कर एक दीपक कोट्स पढ़ते हैं.

किश्ती toofan से निकल सकती है.

बुझता हुआ चिराग भी जल sakta है.

Himmat न हार, न apne इरादे बदल,

ये Zindgi है मेरे दोस्त, 

किसी भी समय बदल सकती है.

दीपक कौन बनाता है?

दीपक मिट्टी को पकाकर कुम्हारों के द्वारा बनाया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में दिवाली के त्यौहार में दीपक का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है. दिवाली पर हिन्दू लोग दीये को तेल और बाती से सजाकर रात में घर को सजाते है. मिटटी के दीपक की महिमा बड़ी अद्भुत होती है.  दीये दीपावली में घर के कोने-कोने में roshni बिखेरते है. दीये का प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों और कई जगहों पर किया जाता है.

आजकल धातु, मिट्टी के अलावा कागज़ के deeye भी market में मिल जाते हैं. kagaj के diye को आपे नर्मदा जयंती पर दीपदान के समय देखा होगा.

अगर आपको धातु के दीपक चाहिए तो आप बर्तनों की दुकानों पर और jweller की दुकान पर देख सकते हैं. धार्मिक कार्यों के अतिरिक्त जिंदगी की परेशानियों को दूर करने में भी दीपक का prayog किया जाता है. 

जिंदगी में success, money और health के लिए दीपक का बहुत ही महत्वपूर्ण उपयोग है. मनोवैज्ञानिक रूप से दीपक हमारी सोच विचारों पर एक positive प्रभाव डालते हैं. क्या आपने कभी किसी ट्रक के पीछे लिखा देखा है: 'जलो मगर दीपक की तरह'.

दीपक और महानता कोट्स

दीपक बोलता नहीं परन्तु  deepak का कर्म उसकी रोशनी उसका परिचय देता है. इसी तरह महान वही लोग होते है जिनका कर्म परिचय दें. महान लोग दीपक की भांति होते हैं जिनका जीवन दूसरे लोगों के लिए मार्गदर्शन का काम करता है. 

दुनिया में कोई भी अपने जन्म से छोटा या बड़ा नहीं है; व्यक्ति अपने कर्मों से छोटा या बड़ा बन जाता है. जिस तरह दीपक और घड़ा एक ही मिटटी से बने होते हैं लेकिन दीपक का महत्व अलग है और घड़े का अलग. मनुष्य अपनी उपयोगिता की वजह से ही अपना स्थान प्राप्त करता है. 

किस बात का प्रतीक है दीपक

दीपक अंधकार को दूर भगाने का, दृढ निश्चय का, मजबूत इच्छाशक्ति का और रास्ता दिखने का प्रतीक है. कहते हैं जलो तो दीये की तरह. 

ख़ुशी व्यक्त करने के लिए दीपक एक शानदार माध्यम है. भगवान राम जब लंका से वापस अयोध्या लौटे थे तब अयोध्या नगर वासियों ने उनके स्वागत और ख़ुशी में दीये जलाए थे. आज भी कुछ लोगों को यह कहते हुए सुन सकते हैं कि मेरा यह काम हो जाए तो मैं घी के दिए जलाऊंगा. यहाँ घी के दीये जलाने का अर्थ बहुत अधिक प्रसन्नता होना है. धार्मिक कार्यों में भी घी के दिए जलाने का विशेष महत्त्व है. यह धार्मिक अनुष्ठानों का एक ख़ास हिस्सा है. यह भगवान को प्रसन्न करने के लिए भी किया जाता है.

दीपावली की रात को कुछ घरों में दीपक को एक थाली से ढँक कर रखा जाता है. सुबह होते ही इस दीपक से थाली में जो काजल बनता है उसे आँखों में लगाने का रिवाज है. इसके पीछे मान्यता है कि इससे साल भर आँखें अच्छी रहती हैं. इसके पीछे क्या वैज्ञानिक सिद्धांत है यह हम नहीं कह सकते.

भारतीय संस्कृति में दीपक का बहुत खास importance है जिसे ऐतिहासिक अभिलेखों और पुरातात्विक अवशेषों में भी देखा जा सकता है. बहुत ख़ास बात यह है कि सैकड़ों हजारों साल पहले की सभ्यताओं के अवशेषों में भी दीपक मिले हैं. इसे पत्थर की मूर्तियों के साथ भी देखा गया है.

दीपक कितने प्रकार के होते हैं और प्रत्येक प्रकार के दीपक का क्या प्रयोजन होता है?

अगर हम विस्तार से देखें तो पाएंगे कि दीये सिर्फ मिट्टी के नहीं होते बल्कि कागज, आटा और तरह तरह की धातुओं के भी दीये बनाये जाते हैं. धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से in सभी दीयों का अपना एक विशेष importance होता है. प्रत्येक प्रकार के दीपक को अलग अलग उद्देश्य के लिए प्रयुक्त किया जाता है. हाँ, यह बात अलग है कि दैनिक जीवन में साधारणतया हम मिट्टी, पीतल, स्टील अथवा तांबे के बने हुए दीपक उपयोग में लेते हैं. 

यह हम हमारे उपयोग और सुविधा के हिसाब से तय करते हैं. मिट्टी के दीये आमतौर पर आसानी से मिल जाते हैं. दीपावली पूजन के बाद भी बहुत से deepak बच जाते हैं जो साल भर उपयोग में आते हैं. वैसे पिछले कुछ सालों से market में चाइनीज लाइट भी खूब बिक रही हैं लेकिन ये कभी भी दीयों का स्थान नहीं ले सकतीं. मिट्टी के दीपक पर्यावरण से जुड़े हैं और इनमें मिट्टी की खुशबू है.

Mitti के diye

मिट्टी के diye का अपना खास महत्त्व है. यह दिये हर रोज लोग अपने घरों में जलाते हैं. इसके पीछे मान्यता है कि प्रतिदिन mitti ke diye जलने से घर में सुख और सम्रद्धि का वास होता है.

मिट्टी के दिये मंगल देवता और शनिदेव को प्रसन्न करते हैं. अमूमन अधिकांश भारतीय घरों में, मंदिरों और ऑफिस में मिट्टी के दिये मिल जायेंगे. मिट्टी के दीपक पंचतत्वों का प्रतीक (symbol) माने जाते हैं. गाँव और कस्बों में इन्हें कुम्हार के पास से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है.


आजकल दीवाली के समय विभिन्न प्रकार के दीये देखने को मिलते हैं. इनमें से ज्यादातर सिर्फ दीवाली पूजन के उद्देश्य से बनाये और बेंचे जाते हैं. अगर किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान हेतु दीपक चाहिए तो इसके लिए market में तलाशना पड़ता है. लगभग हर कसबे में पूजन की दुकान में दीपक मिल जाते हैं.

किस किस धातुओं के दीपक बनाये जाते हैं

भारत में विभिन्न पारकर की धातुओं के दीपक पाए जाते हैं जैसे चांदी के दीपक, कांसे के दीपक, ताम्बे के दीपक और पीतल अथवा लोहे के दीपक. प्रत्येक प्रकार की धातु के दीपक का विशेष महत्व है. हिन्दू धर्म में in सभी प्रकार के दीपकों का महत्त्व बताया गया है. हर धातु का अपना एक विशेष महत्त्व होता है. अलग अलग तरह के दोषों और विकारों की शांति के लिए अलग अलग धातु के दीपक जलने का विधान धर्मग्रंथों में विस्तार से बतलाया गया है.

बुद्धि और उन्नति के लिए सोने के दीपक का उपयोग

सोने के दीपक को उन्नति और बुद्धि प्राप्त करने के लिए विशेष फलदायी माना गया है. Gold के दीपक में गुरु और सूर्य का वास माना गया है. इस विशिष्ट फल की प्राप्ति के लिए सोने के दीपक को पूजा वेदी के मध्य भाग में गेहूं का आसन देकर चारों तरफ लाल कमल या गुलाब के फूल की पंखुड़ियां बिखेर कर स्थापित करते हैं. Gold के दीपक  में गाय का शुद्ध घी डालें तथा रूई की लंबी बत्ती लगाकर इसका मुख पूर्व दिशा की ओर रखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इससे हर प्रकार की उन्नति तथा बुद्धि में निरंतर वृद्धि होती रहेगी.

पीतल का दीपक किस उद्देश्य की पूर्ति में सहायः होता है

ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि पीले रंग का पीतल देवगुरु वृहस्पति को प्रिय है. इसलिए गृह शांति एवं धार्मिक अनुष्ठानों में पीतल के बर्तनों को दान करने का विधान है.

हिंदू धर्म में घर में पीतल के बर्तन रखना शुभ माना जाता है. पीतल एक मिश्र धातु है. पीतल शब्द पीत शब्द से बना है जिसका अर्थ पीला (Yellow) है. 

कहा जाता है कि वैभवलक्ष्मी व्रत के दिन पीतल के दीये में शुद्ध घी भर कर दीप जलाने से धन संपदा की निश्चित प्राप्ति होती है.

पीतल के बारे में मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन भगवन श्रीकृष्ण पर शुद्ध घी से भरा कलश चढ़ा कर निर्धन विप्र को दान करने से अटूट धन की प्राप्ति होती है. 

माँ बगलामुखी की आराधना में पीतल के बर्तन ही prayog में लिए जाते हैं. इस बात से सिद्ध होता है कि तरह तरह के दीपकों का अपना अपना महत्त्व होता है.

पीतल के कलश और दीपक आसानी बर्तनों की दुकान पर मिल जाते हैं. अगर आप पीतल के दीपक को online मंगाना चाहें तो इसे अमेज़न पर भी आर्डर कर सकते हैं.

तांबे का दीपक किस काम आता है

सामान्य रूप से अधिकांश भारतीय घरों में ताम्बे का दीपक मिल सकता है. बताया जाता है कि तांबे के दीपक में मंगल का वास होता है. मनोबल में वृद्धि करने के लिए और अनिष्टों का नाश करने के लिए Copper दीपक का विशिष्ट उपयोग है. तांबे के दीपक को लाल मसूर की दाल का आसन देकर चारों तरफ लाल फूलों की पंखुड़ियों को बिखेर कर दक्षिण दिशा में स्थापित किया जाता है.  इस तांबे के दीपक में तिल का तेल डाल कर  और रूई की लंबी बत्ती जलाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि तांबे के दीपक में तिल का तेल डालने से मनोबल में वृद्धि होगी तथा अनिष्टों का नाश होता है. 

Copper के दीपक का यह prayog बहुत ही सरल है. इसे आसानी से किये जा सकता है. ऐसे परिवार जहाँ सबके मन निराश हों उन्हें यह prayog करने की सलाह दी जाती है. Life में problems को दूर करने के लिए घर तांबे का दीपक जलना बहुत अच्छा संकेत माना जाता है.

किस काम आता है चांदी का दीपक

चांदी के दीपक में चन्द्र व शुक्र का वास माना जाता है. Silver metal के दीपक को सात्विक धन के लिए उपयोगी माना जाता है. सात्विक धन से तात्पर्य सही तरीके से earn की गई money से है. यह एक आम सोच है कि सात्विक money ही अच्छी होती है. और ऐसा पैसा बरकत देता है. बहुत से घरों में आपको चांदी का दीपक मिल जायेगा, लेकिन इसका सही prayog करने पर ही इससे लाभ मिलना बताया जाता है.  चांदी के दीपक को चावलों का आसन देकर सफेद गुलाब या अन्य सफेद फूलों की पंखुड़ियों को चारों तरफ बिखेर कर पूर्व दिशा में स्थापित किया जाता है.  इसमें गाय का शुद्ध देशी घी का ही प्रयोग करना चाहिए. मान्यता है कि चांदी का दीपक जलाने से घर में सात्विक धन की वृद्धि होगी.

मित्रों चांदी, सोने और तांबे की तरह ही लोहे और कांसे के दीपक भी बनाये जाते हैं. कांसे का दीपक धन की स्थिरता और निरंतरता के लिए बहुत ही कारगर मानते हैं. लोहा धातु का दीपक अनिष्ट और दुर्घटनाओं से बचाव के लिए कारगर माना जाता है.

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आटे के दीपक

भारत में दीपक का इतना व्यापक महत्त्व है कि नर्मदा जयंती, रामनवमी, दशहरा, दीवाली पर आप कई कई तरह के दीपक देख सकते हैं. आटे का दीपक भी एक अलग महत्त्व रखता है. नर्मदा जयंती के दिन आटे के दीपक का बहुत उपयोग होता है.

हर साल नर्मदा जयंती के शुभ अवसर पर नर्मदा नदी के किनारे हजारों लाखों आटे के दीपक जलाये जाते हैं. आटे का दीपक विभिन्न प्रकार की साधना और मनोकामना प्राप्ति के लिए prayog किया जाता है.


विशेष अवसरों के लिए ख़ास दीपक

महिलाओं के ख़ास त्यौहार करवा चौथ पर कुम्हार एक विशेष प्रकार का कलश और दीपक तैयार करता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत में करवा चौथ का दीपक लिया जाता है. इसी तरह दीवाली पर मिट्टी के दीपक खरीदना बहुत शुभ कार्य माना जाता है. माँ लक्ष्मी की पूजा के लिए बाजार में कुछ ख़ास तरह के दीये भी मिलते हैं. विशेष अवसरों के लिए इन्हीं विशेष दीपकों का उपयोग वांछनीय माना जाता है. बाजार में एक बाती वाले दीये, तीन बाती वाले दीये, चौमुखा दीपक, पांच बाती वाले दीये भी मिलते हैं. जैसी पूजा वैसे दीये.

विभिन्न प्रकार के तेल के Deepak

धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दीपक का इतना महत्त्व है कि आप सोच भी नहीं सकते. भारत में सनातन काल से ही दीपक का prayog किया जाता रहा है. कई तरह के तेल के दीपक का भी इस्तेमाल किया जाता है जैसे: मीठे तेल का दीपक, सरसों के तेल का दीपक, घी का दीपक, तिल के तेल का दीपक, चमेली के तेल का दीपक, महुए के तेल का दीपक, अलसी के तेल का दीपक आदि.

घी का दीपक प्रतिदिन जलाने से कई लाभ बताये जाते हैं. सरसों के तेल का दीपक भी बहुत से लोग जलाते हैं.

दीपक की महिमा यहीं पर ख़त्म नहीं होती. एक विशेष प्रकार का दीपक भी बनाया जाता है जिसे कंजूस बत्ती कहते हैं. कंजूस बत्ती का उपयोग रामायण अखंड पाठ के समय भी करते हैं.

बड़े बड़े पाठों के दौरान भी कंजूस बत्ती का prayog करते हैं.

क्या होती है कंजूस बत्ती


कंजूस बत्ती एक तरह की ऐसी बत्ती है जिसे बहुत कम तेल या घी में ज्यादा समय तक उपयोग में ले सकते हैं. इसमें बत्ती को बहुत ही बारीक करके दीपक में लगाया जाता है जिससे यह कम मात्रा में ज्यादा समय तक चले. आमतौर पर इसके लिए दीपक भी विशेष तरह का prayog में लिया जाता है. इसको लालटेन वाले कांच से चरों ओर से cover किया जाता है ताकि हवा से बुझने न पाए. इस को आप अभी भी नवदुर्गा उत्सव, जवारे और रामचरितमानस अखंड पाठ के समय देख सकते हैं. 

Generally kanjus batti में घी का ही उपयोग किया जाता है.

यह बात ध्यान रखने योग्य है कि इसके नाम कंजूस बत्ती से इस का महत्त्व कम नहीं होता.

दीपक जलने की विधि और स्थान

हिंदू संस्कृति में हर परिवार दीपक को एक विशिष्ट धार्मिक समग्री के रूप में जानता है. प्राचीन काल से घर के दरवाजे पर प्रतिदिन संध्या को दीपक जलना शुभ और मंगलकारी माना जाता है. कहते हैं प्रतिदिन संध्या को दीपक जलाने  से माता लक्ष्मीजी बहुत प्रसन्न होती हैं और घर में सुख, संपत्ति और समृद्धि आती है. दीपक जलने की सही विधि क्या है? इसके विषय में शास्त्रों में विस्तार से जानकारी दी गई है. घर के मुख्यद्वार पर, घर की रसोई में और पूजा स्थल पर दीपक जलाना बड़ा शुभ मानते हैं. 

कई बिगड़े कामों को बनाने में दीपक जलने से सफलता प्राप्त होतो है ऐसा विश्वास किया जाता है.

वास्तु शास्त्र में बताया है कि घर की दक्षिण दिशा में प्रतिदिन दीपक जलाने से घर में रुपयों पैसों की कोई कमी नहीं रहती.

घर में प्रतिदिन दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा संचरण होने लगता है. ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ कुछ लोगों ने विशेष विधि से नियमित रूप से दीप जलाना प्रारंभ किया तो उनकी परेशानियाँ दूर होती गईं. Deepak ka mahatv आश्चर्यजनक है.

विद्यार्थियों के लिए दीप जलाने का विशेष महत्व बताया गया है. यह उनकी पढाई लिखाई में एकाग्रता बढाने वाला होता है.

अगर बिना किसी मनोकामना के भी घर में रोज दीप जलाएंगे तो इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है ऐसा बताया जाता है.

आशा है दीपक का महत्व विषय पर यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी. अपने सुझाव हमें comments के माध्यम से अवश्य पहुंचाएं.


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